झारखंड के एंटी-डिस्प्लेसमेंट एक्टिविस्ट दामोदर तुरी ने कहा कि “एंकाउंटर” और “शांति वार्ता” के नाम पर कॉर्पोरेट लूट का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें न्याय आधारित शांति के लिये संघर्ष जारी रखना होगा न कि अन्याय आधारित शांति के लिये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रही शांति वार्ताएँ और कुछ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण जनता के आंदोलन के साथ विश्वासघात है।
वह 3 नवम्बर को फोरम अगैन्स्ट कॉर्पोरेटाईजेशन एण्ड मिलीटराईजेशन (एफएसीएएम) की तरफ से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस – “ए रीपब्लिक किलिंग इट्स ओन चिल्ड्रन” – में बोल रहे थे।
यह कार्यक्रम बस्तर में कॉर्पोरेट लूट के लिये हो रही हत्याओं पर था और दिल्ली में एफएसीएएम के सदस्यों एहतमाम, बादल भगत सिंह छात्र एकता मंच (बीएससीईएम) के कार्यकर्ताओं गुरकीरत, गौरव गौरांग, नजरिया मैगज़ीन के सदस्य रुद्रा को अवैध रूप से हिरासत में रख कर की गई यातना पर था।
भगत सिंह छात्र एकता मंच की सदस्य गुरकीरत, जो ख़ुद भी ग़ैरक़ानूनी तरीके से हिरासत में रखी गई थीं, ने विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों पर ‘सुरजकुंड स्कीम’ के तहत बढ़ते दमन पर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने एक झूठे “मिसिंग पर्सन” केस के बहाने उन्हें और एफएसीएएम से जुड़े अन्य कार्यकर्ताओं को यातना दी। उन्होंने यह भी कहा कि इसी ग़ायब करने की साज़िश का इस्तेमाल एनआईए ने कार्यकर्ता प्रियंशु कश्यप की ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारी के लिये किया।
शांति प्रिया, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के दिवंगत सीसी सदस्य कट्टा रामचंद्र रेड्डी की पत्नी हैं, ने यह बताया कि 2008 में अपनी गिरफ्तारी के दौरान उन्हें किस प्रकार मानसिक और शारीरिक यातना दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके नाबालिग बच्चों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव डाला और बताया कि किस तरह राज्य ने कट्टा रामचंद्र रेड्डी की मौत की स्वतंत्र पोस्ट-मॉर्टम जांच को रोकने की कोशिश की। जब कट्टा रामचंद्र और कादरी सत्यनारायण रेड्डी के शव परिजनों को मिले तब उनके शरीर बुरी तरह क्षत-विक्षत थे, यातना के भारी निशान थे।
हिमांशु कुमार ने ‘ऑपरेशन कगार’ के नाम पर आदिवासियों की बर्बर हत्याओं पर बात की और यह भी समझाया कि माओवादी आंदोलन का सामाजिक-आर्थिक स्वरूप क्या है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह जन आंदोलनों को कुचलने में बलात्कार का इस्तेमाल किया गया और कैसे सत्तापक्ष दलों द्वारा महिलाओं और एंटी-कास्ट एक्टिविस्टों पर सशस्त्र हिंसा चलाई जाती है।
राजा चंद्रा, जो कट्टा रामचंद्र रेड्डी के बेटे हैं, ने बताया कि राज्य के अधिकारियों ने यातना के सबूत छिपाने के लिये नक़ली पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट तैयार करवाई। अधिकारियों ने धमकी दी थी कि वे रामचंद्र का शव परिवार को दिए बिना ही जला देंगे जैसा उन्होंने बसवराज के साथ किया था। और जब सुप्रीम कोर्ट ने शव को संरक्षित रखने का आदेश दिया तब भी अधिकारियों ने कोर्ट द्वारा नियुक्त स्वतंत्र जांच करने पर जोर दिया।
इसके बाद रवि नारला ने बताया कि किस तरह राज्य की सुरक्षा एजेंसियों ने निहत्थे माओवादियों की हत्या की। उन्होंने बताया कि मध्य भारत का आदिवासी समुदाय अपने जल-जंगल-ज़मीन की लूट के खिलाफ़ हथियार माओवादियों के आने से पहले से ही उठा रहा था। और उन्होंने कहा कि भारत में माओवादी आंदोलन के पूरे इतिहास में अनेक नेताओं और संगठन के कैडरों को सशस्त्र विद्रोह शुरू होने से पहले ही मार दिया गया था।
झारखंड के एंटी-डिस्प्लेसमेंट एक्टिविस्ट दामोदर तुरी ने कहा कि “एंकाउंटर” और “शांति वार्ता” के नाम पर कॉर्पोरेट लूट का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें न्याय आधारित शांति के लिये संघर्ष जारी रखना होगा न कि अन्याय आधारित शांति के लिये। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चल रही शांति वार्ताएँ और कुछ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण जनता के आंदोलन के साथ विश्वासघात है।
अजीत, जिन्हें के. मुरली के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिये एक ऑडियो संदेश भेजा जिसमें उन्होंने बसवराज और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को श्रद्धांजलि दी। और उन्होंने कहा कि वासुदेव राव और वेणुगोपाल राव द्वारा इस विरासत को बदनाम किया जा रहा है।
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में जिन साथियों को अवैध हिरासत में रखा गया और यातनाएं दी गई उस पर एक पुस्तिका जारी की गई जिसमें उन सभी एक्टिविस्टों की गवाही दर्ज है जिन्हें दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने ग़ैरक़ानूनी तरीके से अगवा कर यातना दी थी।
अंत में कारवाँ-ए-इंक़िलाब, जो दिल्ली विश्वविद्यालय का एक सांस्कृतिक समूह है, ने एंटी-डिस्प्लेसमेंट आंदोलन पर एक गीत प्रस्तुत किया।